काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Monday, 1 August 2011
जीना है तो किताबों की दुनिया से निकल, बस दुनिया को देख और जिन्दगी को पढ़ !