कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Tuesday, 31 August 2010

दुनिया लेती रही परीक्षा, इम्तिहान देता रहा;
जब पूछा मैंने तो बोली, सुन न पाऊँगी व्यथा !
Science हुई द्रौपदी अब तो, दुस्शासन का बोल हुआ;
भीष्म पितामह मौन बद्धे हैं, फिर भारत लाचार हुआ !
सच पाण्डव-सा सिमट रहा है, Data कौरव-सा आबाद हुआ;
कौरव अब फल-फ़ूल रहें हैं, पाण्डव का सीमित अधिकार हुआ !!

Thursday, 26 August 2010

जीवन तो अब स्वप्न हुआ है,यह सपना भी स्वप्न रहा !
मिलन मौत से हो ऐसे, जैसे आलिंगन चिर-यौवन का !!
बे-रंग और बद-रंग सी जिन्दगी हो गयी;
अपने लोगों ने ही जायके का काम किया !
ज़हर सुधा लगने लगे, जीवन में ऐसा भी पल आता है;
जब अपने, खुद पर भारी पड़े मन विचलित हो जाता है !

Thursday, 19 August 2010

हवाओं का वो उलटा रुख, समय का पलटा फेरा भी !
जहाँ देखा वहाँ पाया, सच मौत माफ़िक भहरा कभी !!
जात-पात, ऊँच-नीच से कबके दूर हो चुके हैं; पर घर की दहलीज़ अभी तक लांघ नहीं पाये !
दुनिया भले मुट्ठी में हो जाये, घर की झूठी आन में; सदा तार-तार हुएँ, न चल पाये न पल पाये !!
जिन्दगी जुए की तरह, जीने की लालसा जगाती है!
और इंसान जुआरी की तरह, खुद को लुटा आता है !!

Friday, 6 August 2010

बिरही मन अपना होता है, सुन लो ये अच्छा होता है !
खुद में रमने वाला ही, सीधा-सादा सच्चा होता है !!

Sunday, 1 August 2010

नरगिसी नैनों का जादू, आजतक चलता रहा ;
उर्वशी के नृत्य पर विश्वामित्र घायल मलता रहा !
आह-वाह की दूरियाँ कबसे-कबतक नपता रहा;
जीवन के मयखाने में नित-नव प्याला सजता रहा !!