कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Thursday, 15 December 2011

काम जो करता नहीं, विश्राम जो करता नहीं;
रूप जिसका है नहीं, स्वरुप ब्रह्म का वही !!

Thursday, 27 October 2011

आज मैं वहीं पे हूँ, जो मुद्दतों के बाद हूँ;
ये अंतराल देन हैं, जो कहते मैं आबाद हूँ!
मुझमे इस तरह शामिल, कि खुद को भूल जाता हूँ;
निगाहें नम-सी रहती है, कभी जब याद आता हूँ !

Monday, 1 August 2011

जीना है तो किताबों की दुनिया से निकल,
बस दुनिया को देख और जिन्दगी को पढ़ !

Sunday, 31 July 2011

स्वप्न सुरा के नगरी में, हम सब हैं प्याले-प्याले;
टूट गए, कब उठ गए, ये खबर नहीं है प्याले को !

Sunday, 22 May 2011

परेशानियों में हरदम विश्राम करता हूँ,
परेशानियाँ न हो तो,परेशान रहता हूँ !
सोच के परेशान हूँ मैं, क्यों न सोचूँ ये भी बला !
सच खड़ा कटोरी लिए है, झूठ का सीना बढ़ा !!
जब नहीं मिला तो नहीं मिला, वो अक्षर बन पर्याय हुआ,
दुनिया के ठोकर से आगे, बढ़-बढ़कर नया स्वाध्याय हुआ !
उम्मीद के उजाले पर चलने वाला;
अब अँधेरे में रौशनी से टूट जाता है.
होश में रहता कहाँ हूँ, होश का आगाज़ हूँ !
जिन्दगी के हाशिये पर आज़ का मिजाज़ हूँ !

Tuesday, 3 May 2011

Jaidev::Yeh Khwab Sa Dekha Tha

"MERI JAA,MUJHE JAA NA KAHON"BY GEETA DUTT,L:GULZAR,M:KANU ROY-"ANUBHAV-...

"PHIR KAHI KOYEE PHOOL KHILA"BY MANNA DEY,M.D:KANU ROY-"ANUBHAV-1971"

Aavishkar - Hansne ki chah ne kitna mujhe rulaya hain

Jaidev::Seene Mein Jalan

अपलक निहारती पलकों में, सवालों का बवंडर था;
अगर होना यही था तो, हमें बुलवा लिया होता !!
गाता हूँ, गुनगुनाता हूँ, फ़ुरसत मिले तो मुस्कुराता हूँ;
फ़ुरसत की मंदी में, मुश्किल से खुद को मिल पाता हूँ !
लाचार और बे-ज़ार जिन्दगी में क्या-क्या दिखाता हूँ
जो मिला खोता गया, बस खोये ख्यालों में खो जाता हूँ !!

Saturday, 16 April 2011

सोच के परेशान हूँ मैं, क्यों न सोचूँ ये भी बला !
सच खड़ा कटोरी लिए है, झूठ का सीना बढ़ा !!