कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Saturday, 14 February 2015

खोता गया खुद को, तो वज़ूद  का पता चला !
पता चला यही कि  जो मैं  हूँ , वो मैं  नहीं हूँ  !!

Tuesday, 10 February 2015

मौत ने खोजा जीवन को, जीवन ने भी हामी भर दी!
हुआ असर मिलन का ऐसा,जीवन ने साँसे अंतिम ली!

Sunday, 8 February 2015

Barahguna: Imagination

Barahguna: Imagination: Human imagination is boundless, only barrier is intelligence. The intelligence is the place where from  fear born, restrict flow of thoughts...

Tuesday, 13 November 2012



जीवन में मैं पीस रहा हूँ, नित्-नित् अपनी गति द्वारा !
कालचक्र का घूर्णन तो है, बंधा हुआ नियति द्वारा !!

Sunday, 5 February 2012

बात चली सब बात के आगे, सब बात के आगे बात चली;
बात चली और बात हुई की बात के आगे बात चलेगी !!

Thursday, 15 December 2011

काम जो करता नहीं, विश्राम जो करता नहीं;
रूप जिसका है नहीं, स्वरुप ब्रह्म का वही !!