कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Thursday, 9 December 2010

मेरे गुफ़्तगू, मेरे बयां, मेरे अफ़साने कभी मेल नहीं खाते !
एक-दूसरे से हैं जुदा; पर एक ही हैं सब, हमको पता है !!

Wednesday, 8 December 2010

वो तेरा बड़-बोलापन और तेरा पुचकारना, मुझमे इस तरह शामिल, कि खुद को भूल जाता हूँ;
क्या मिले, कैसे मिले और मिले अंदाज से हम, निगाहें नम-सी रहती है, कभी जब सोच आता हूँ!
मेरी यादों में नैना बहायी सखी, इस कदर मुझको तुमने है पाया सही;
अश्क तेरे गिरे गिरके दिल पे पड़े, दर्द बनके जो सबसे अजीज हो गयें !
जिन्दगी का भरोसा कभी-भी न था, भरोसा किया जिन पर महंगा पड़ा;
घर के पाठशाला में है जब तालें पड़ें, तेरी यादों का दीपक जलाता गया!

Friday, 3 December 2010

आज मुझसे ना पूछो, कि क्या हो गया; आँधी से मिला और मजा आ गया !
हलचलें जिन्दगी की तो कम ना हुई; हौसलों को बुलंदी पे पहुँचा गया !!
बहुत साल पहले कुसुम गीत गाया; धरा भी मेरी थी गगन भी मेरा था !
उसी आश की प्यास में जी रहा हूँ, जीवन मेरा जब सुगंधा भरा था !!