कुछ कदम चला करूँ , ये सोचता हूँ बार बार
मंजिलें कहीं भी हों , पर राह ही हमारें यार !
बरबस कहीं पर हम भी बरसात में भींगे,
कभी याद में भींगे, कभी फ़रियाद में भींगे !
कुछ तो बात है.....
खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !
काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Thursday, 29 April 2010
Wednesday, 28 April 2010
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