कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Thursday, 29 April 2010

hmmm..

कुछ कदम चला करूँ , ये सोचता हूँ बार बार
मंजिलें कहीं भी हों , पर राह ही हमारें यार !

बरबस कहीं पर हम भी बरसात में भींगे,
कभी याद में भींगे, कभी फ़रियाद में भींगे !

Wednesday, 28 April 2010

Duplet

अस्त हूँ मैं व्यस्त हूँ , पस्त तो होता नहीं;
जिन्दगी के राह में, राही सदा मदमस्त हूँ !

Tuesday, 27 April 2010

नयन-नीर में हमने भी कितने सपनों को धो डाला,
बीती की क्या बात करें, अभी शेष और भी हाला !
मिज़ाजे मुफलिसी का बयां भी कुछ यही है,
न खुद को देखता हूँ , न खुद से मिलता हूँ !!