Nautanki
कुछ तो बात है.....
खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !
काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Thursday, 15 December 2011
काम जो करता नहीं, विश्राम जो करता नहीं;
रूप जिसका है नहीं, स्वरुप ब्रह्म का वही !!
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment