कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Tuesday, 13 November 2012



जीवन में मैं पीस रहा हूँ, नित्-नित् अपनी गति द्वारा !
कालचक्र का घूर्णन तो है, बंधा हुआ नियति द्वारा !!

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