काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Friday, 3 December 2010
बहुत साल पहले कुसुम गीत गाया; धरा भी मेरी थी गगन भी मेरा था ! उसी आश की प्यास में जी रहा हूँ, जीवन मेरा जब सुगंधा भरा था !!
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