कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Wednesday, 8 December 2010

मेरी यादों में नैना बहायी सखी, इस कदर मुझको तुमने है पाया सही;
अश्क तेरे गिरे गिरके दिल पे पड़े, दर्द बनके जो सबसे अजीज हो गयें !
जिन्दगी का भरोसा कभी-भी न था, भरोसा किया जिन पर महंगा पड़ा;
घर के पाठशाला में है जब तालें पड़ें, तेरी यादों का दीपक जलाता गया!

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