मेरी यादों में नैना बहायी सखी, इस कदर मुझको तुमने है पाया सही;
अश्क तेरे गिरे गिरके दिल पे पड़े, दर्द बनके जो सबसे अजीज हो गयें !
जिन्दगी का भरोसा कभी-भी न था, भरोसा किया जिन पर महंगा पड़ा;
घर के पाठशाला में है जब तालें पड़ें, तेरी यादों का दीपक जलाता गया!
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