काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Sunday, 22 May 2011
जब नहीं मिला तो नहीं मिला, वो अक्षर बन पर्याय हुआ, दुनिया के ठोकर से आगे, बढ़-बढ़कर नया स्वाध्याय हुआ !
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