काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Tuesday, 10 February 2015
मौत ने खोजा जीवन को, जीवन ने भी हामी भर दी!
हुआ असर मिलन का ऐसा,जीवन ने साँसे अंतिम ली!
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