कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Friday, 30 July 2010

भिक्षा

आकाश के नीचे, धरा पर अकिंचन-सा खड़ा हूँ;
मुझे भिक्षा चाहिए श्रद्धा,ज्ञान और विश्वास का !

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