जाने कब से हँसी दफ़न हो चुकी है, और लोग पूछते हैं- इतना हँसते क्यों हो ?
समाज के थपेड़े खाकर बड़ा हुआ, अब समाज कहता है- निष्ठुर हो गए हो!!
जिन्दगी को किताब की तरह पढता गया, कुछ लोग कहते हैं- निपुण हो गए हो!
सदा जो करीब हैं, जिनको कभी भूला नहीं, अब वही सोचते हैं- गैर हो गए हो !!
Really nice....
ReplyDeleteThank you.
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