काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Thursday, 26 August 2010
जीवन तो अब स्वप्न हुआ है,यह सपना भी स्वप्न रहा ! मिलन मौत से हो ऐसे, जैसे आलिंगन चिर-यौवन का !!
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