काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Tuesday, 31 August 2010
Science हुई द्रौपदी अब तो, दुस्शासन का बोल हुआ; भीष्म पितामह मौन बद्धे हैं, फिर भारत लाचार हुआ ! सच पाण्डव-सा सिमट रहा है, Data कौरव-सा आबाद हुआ; कौरव अब फल-फ़ूल रहें हैं, पाण्डव का सीमित अधिकार हुआ !!
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