आदतों से इश्क है, इबादतों में इश्क है,
इश्किया फिर क्या करें ये जहाँ ही इश्क हैं.
तुम कहो कि मैं कहूँ, मैं कहूँ कि तुम कहों,
ये कहा सुनी भी एक शब्द-रूप इश्क है.
खौफ़ से बेख़ौफ़ होकर जिन्दगी हमने जीया ;
क्या पता था मौत भी बेख़ौफ़ से मिल जाएगी !
खैरियत रही की कोई आज भी पास-पास है,
कब तलक कोई रहेगा, कब तलक कोई रहे!!
well said. in fact, this attitude drives you to acclaim new heights in our respective life.
ReplyDeleteno need to be stereotype.