कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Thursday, 6 May 2010

hmmm..

उहापोह सा जीवन करके, खुद से खुद को ही छलता हूँ;
क्षणभंगुर जीवन के पल है, इस पल में पल-पल मरता हूँ!
चाह हमें भी जीने का है, पर दुखों में युग-युग चलता हूँ;
विधि विवश कोशिश काफूर, खुद से अब रूठा रहता हूँ !

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