काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Monday, 3 May 2010
खुशियाँ ऐसी मिली, अरमान गला का घोटती, अब बढ़ी हैं मुश्किलें हमको समझने में ख़ुशी !!
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