काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Sunday, 23 May 2010
!! जीवन !!
सोच-बूझ का मोल नहीं है, जीवन तो बस सपना सा है ! यह सपना भी विघ्न भरा है, हर कोशिश दुःख में रहता है! पल-पल जिससे नेह लगाया, हार गया पग-पग उससे ही ! नियत गति जीवन-मृत्यु है , साँसों का आना जाना ही !
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