काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Saturday, 8 May 2010
!! कुछ अलग करो !!
कुछ अलग करो जीवन में, अथक रहे प्रयास; घटना घटित होते रहती है, कभी कभी इतिहास ! बीहड़ कंकड़ भरी हो राहें, खोना ना विश्वास; चलते रहो भटक राहों पर, बन जाये कुछ खास !
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