काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये; झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये ! बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये; बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!
Thursday, 6 May 2010
!! कोशिश !!
कोशिश कर मेरे मन तुम भी, सफल चित्तेरे बनने का; दूर भ्रमण करते रहता है, कोशिश कर मुझमे रहने का ! अथक प्रयास करते रहता हूँ, तुम्हे करीब बुलाने का ; नियति से हम बंधें हुए हैं, पर कोशिश दीप जलाने का !
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