कुछ तो बात है.....

खुद से खुद को दूर करके, अजनबी खुद से बना;
जब मिला खुद से, तो कायनात मेरी हो गयी !

काश! चले कलम कागज़ पर, कोयल इसे सुनाये;
झींगुर दे संगीत मधुर और बन्दर ढोल बजाये !
बाज़े डम-डम डमरू ऐसे भय,आतंक, चिंता मिट जाये;
बन जाये कुछ बात की, जन-जन ख़ुशी मनाये !!


Sunday, 2 May 2010

तूफां से खेला, आँधी से मिला; पत्थर से हाथ मिलाता हूँ !
अविचल मन के परिसर में नित नव सुमन खिलाता हूँ !!

2 comments:

  1. Aapke sakaratmak dristikon se hum sahmat hain.

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  2. dhanyabaad...aapka jeevan aur vichar sada suvasit rahe!!!

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